Hindi Grammar (हिन्दी व्याकरण) PDF Book Download करें

Hello Students, Hello Students, Welcome Back On Upsarkarinaukri.Com, अगर आप हमारी साईट से प्रतिदिन कुछ सीखते हैं. तो आपको पता ही होगा यहाँ हम आपके लिये प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने के लिए नए Notes से लेकर आते हैं जो सभी One Day Exams के साथ सभी Competitive Exams में Helpful होता है. ठीक उसी तरह आज भी हम आपके लिए Hindi Grammar Book PDF  लेकर आये हैं. जिसको आप नीचे दिए गए download बटन से Download कर सकते हैं. जैसा की आप जानते हैं कि हिंदी एक ऐसा विषय है जो हर प्रतियोगी परीक्षा में आता है. इसीलिए आज हम Hindi Vyakran PDF लेकर आये हैं. ये Notes SSC CGL, SSC CHSL, SSC JE, SSC MTS, Police, Railway, Bank और भी बाकी प्रतियोगी परीक्षाओं में आते हैं

Hindi-Vyakran-PDF

Hindi Grammar Notes in Hindi (हिंदी व्याकरण)

Book Summary – हिंदी व्याकरण की Complete जानकारी इस बुक में दी गई है. इस किताब तो आपके साथ शेयर करने का कारण है क्युकी बहुत से छात्रों ने इस किताब को पसन्द किया है लोकप्रिय हिंदी व्याकरण सभी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए एक अनिवार्य गाइड है। यह एक व्यापक पुस्तक भी है जो किसी भी सामान्य परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए उपयोगी होती है। यह उन छात्रों के लिए जरूरी है जो अपने हिंदी व्याकरण और रचना को सीखना और सुधारना चाहते हैं।

मित्रों, आज-कल व्याकरण पर बाजार में अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं। लेकिन फिर भी हमें इन पुस्तकों को लिखने की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई क्योंकि जब भी कोई छात्र यह प्रश्न करता है कि वह हिन्दी व्याकरण के लिए कौन सी किताब को पढ़े तो हम उसे कोई प्रमाणित पुस्तक का नाम नहीं बता पाते। कुछ पुस्तकें है भी तो वह विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर नहीं लिखी गई हैं तथा बहुत ही विस्तार पूर्वक लिखी गई है। जिन्हें पढ़ने के बाद छात्र उब जाते है तथा व्याकरण की कोई बात समझ नहीं पाते।

ऐसी परिस्थिति में छात्रों के लिए ऐसी पुस्तक की नितान्त आवष्यकता थी जिसकी भाषा सरल, विवेचन स्पश्ट और विषय का प्रतिपादन संक्षिप्त रूप में किया गया हो। Vyakaran की कुछ ऐसी ही books का संग्रह आपको डाउनलोड करने के लिए दिया जा रहा हैं। इन्हें पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंकों पर क्ल्कि करके download करें-

किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी भाषा और उसकी संस्कृति से होती है प्रत्येक देश की अपनी विशेष  भाषा और संस्कृति होती है । आज हम अपने देश भारत की राजभाषा हिंदी के बारे में बात करते हैं।

14 सितंबर पूरे भारत देश में हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदी दिवस एक ऐसा अवसर है जो यह बताता है कि भारत की भाषा कितनी समृद्ध है और यह भारत को एकसूत्र में बाँधे रखने का माध्यम भी है।

हिंदी का जन्म देवभाषा संस्कृत से हुआ है तथा हिंदी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘सिन्ध’ शब्द से हुई मानी जाती है। संस्कृत की ‘स’ ध्वनि फ़ारसी में ‘ह’ बोली जाती है, जैसे- सप्ताह को हफ़्ताह आदि। सिन्धु नदी के क्षेत्र में आने के कारण ईरानी लोग सिंधु न कहकर हिन्दू कहने लगे। इसी तरह सिंधी से हिंदी, सिंध से हिंद और हिंदुस्तानी आदि शब्द अस्तित्व में आते गए। हिंदी शब्द का अर्थ है—‘हिंद का’। आगे चलकर यह शब्द ‘हिंदी की भाषा’ के अर्थ में प्रयुक्त होने लगा।

भारत में लाखों लोग हिंदी भाषा का प्रयोग अपनी प्रथम भाषा के रूप में करते हैं। हिंदी का व्याकरण प्राचीन भाषा का अनुसरण करता है। हिंदी का व्याकरण बहुत समृद्ध है तथा नियमानुसार प्रयोग में लाया जाता है। हिंदी में संज्ञा शब्दों के लिंग होते हैं तथा विशेषण और क्रियाएँ लिंग के अनुसार ही बदलती हैं।

हिंदी विश्व में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। हिंदी भारत के अलावा नेपाल, गुयाना, त्रिनिडाड और टोबैगो, सूरीनाम, फिजी और मॉरीशस में भी बोली जाती है। हिंदी और नेपाली एक ही लिपि  में लिखी जाती हैं –- “देवनागरी”। हिंदी भाषा उच्चारण पर आधारित है इसका अर्थ है कि यह जैसे बोली जाती है, वैसे ही लिखी जाती है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, ने अन्य कई भाषाओं के साथ-साथ अमरीकी-भारतीयों की मूल भाषा के रूप में हिंदी को प्राथमिक स्कूल से स्नातक स्तर तक के पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए सहमति दी थी। अमेरिकी सरकार अमेरिकी स्कूल और कॉलेजों में हिंदी सिखाने के लिए अनुदान भी प्रदान करती है।

अँगरेज़ी के कई शब्द हिंदी से प्राप्त किए गए हैं, जैसे– चटनी, लूट, बंगला, गुरु, जंगल, कर्म, योग, ठग, अवतार इत्यादि। आज संयुक्त राज्य अमेरिका के शिक्षा संस्थानों सहित पूरे विश्व के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई व सिखाई जाती है।

गूगल के अनुसार अब इंटरनेट पर भी हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग होने लगा है। पिछले कुछ दशकों में हिंदी के वेब पोर्टल अस्तित्व में आए हैं तभी से इंटरनेट पर हिंदी ने अपनी छाप छोड़नी प्रारंभ कर दी है  जो अब रफ्तार पकड़ चुकी है। हिंदी उन सात भारतीय भाषाओं में से एक है जिसका उपयोग वेब यूआरएल बनाने के लिए किया जा सकता है।

हिंदी व्याकरण (Hindi Vyakaran Book)

व्याकरण- व्याकरण वह विद्या है जिसके द्वारा हमे किसी भाषा का शुद्ध बोलना, लिखना एवं समझना आता है।

भाषा की संरचना के ये नियम सीमित होते हैं और भाषा की अभिव्यक्तियाँ असीमित। एक-एक नियम असंख्य अभिव्यक्तियों को नियंत्रित करता है। भाषा के इन नियमों को एक साथ जिस शास्त्र के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है उस शास्त्र को व्याकरण कहते हैं।

वस्तुतः व्याकरण भाषा के नियमों का संकलन और विश्लेषण करता है और इन नियमों को स्थिर करता है। व्याकरण के ये नियम भाषा को मानक एवं परिनिष्ठित बनते हैं। व्याकरण स्वयं भाषा के नियम नहीं बनाता। एक भाषाभाषी समाज के लोग भाषा के जिस रूप का प्रयोग करते हैं, उसी को आधार मानकर वैयाकरण व्याकरणिक नियमों को निर्धारित करता है। अतः यह कहा जा सकता है कि-

व्याकरण वह शास्त्र है, जिसके द्वारा भाषा का शुद्ध मानक रूप निर्धारित किया जाता है।

व्याकरण के प्रकार

(1) वर्ण या अक्षर
(2) शब्द
(3)वाक्य

व्याकरण के अंग :

व्याकरण हमें भाषा के बारे में जो ज्ञान कराता है उसके तीन अंग हैं- ध्वनि, शब्द और वाक्य।  व्याकरण में इन तीनों का अध्ययन निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत किया जाता है-
(1) ध्वनि-विचार (2) पद-विचार (3) वाक्य-विचार

Contents:

Bhasha; Varn Vichaar; Shabd Vichaar; Sangya; Upsarg aur Pratyya; Ling; Vachan; Karak; Sarvnaam; Visheshan; Kriya; Vachya; Kaal; Avvya; Sandhi; Samas; Vakya; Viraam Chinha; Anek Shabdo ke liye ek Shabd; Vipreetharthak Shabd; Shrutisum Bhinnarthak Shabd; Paryaayvachi Shabd; Ekarthak Shabd; Anekarthak Shabd; Sankshepan; Muhaavra; Kahavatein athva Lokoktiyaan; Vartani-Sambandhi Ashudhiyaan; Vakya-Sambandhi Ashudhiyaan; Patrachaar; Alankaar; Pallavan ya Bhaav-Vistaar; Hindi Anuvaad; Chhand; Aadhunik Bhashayein; Hindi Sahitya ki Pramukh Pravartiyaan evam Visheshtaayein; Hindi Sahitya ki Nai Vidhaayein; Prasidh Rachnayein evam Rachnakaar; Prasiddh Bharatiya Kavi, Lekhak evam Bhashayein.

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1. संधि विच्छेद

2. अलंकार

3. पर्यायवाची शब्द

4. संज्ञा

5. समास

6. हिंदी मुहावरे और अर्थ

7. हिंदी वर्णमाला

8. उपसर्ग

9. प्रत्यय

10. लिंग

11. भाषा, लिपि और व्याकरण

12. वचन

13. सर्वनाम

14. क्रिया

15. विशेषण

16. कारक

17. काल

18. क्रिया विशेषण

19. विलोम शब्द हिन्दी

20. समुच्चयबोधक

21. संबंधबोधक

22. विस्मयादिबोधक

23. वाक्यांश के लिए एक शब्द

24. हिंदी गिनती

25. भिन्नार्थक शब्द

26. अव्यय

27. भाववाचक संज्ञा

28. तत्सम और तद्भव शब्द

29. रस

30. छंद

31. निबंध

32. पत्र लेखन

संधि

संधि दो शब्दों से मिलकर बना है – सम् + धि। जिसका अर्थ होता है ‘मिलना ‘। हमारी हिंदी भाषा में संधि के द्वारा पुरे शब्दों को लिखने की परम्परा नहीं है। लेकिन संस्कृत में संधि के बिना कोई काम नहीं चलता। संस्कृत की व्याकरण की परम्परा बहुत पुरानी है। संस्कृत भाषा को अच्छी तरह जानने के लिए व्याकरण को पढना जरूरी है। शब्द रचना में भी संधियाँ काम करती हैं।

जब दो शब्द मिलते हैं तो पहले शब्द की अंतिम ध्वनि और दूसरे शब्द की पहली ध्वनि आपस में मिलकर जो परिवर्तन लाती हैं उसे संधि कहते हैं। अथार्त संधि किये गये शब्दों को अलग-अलग करके पहले की तरह करना ही संधि विच्छेद कहलाता है। अथार्त जब दो शब्द आपस में मिलकर कोई तीसरा शब्द बनती हैं तब जो परिवर्तन होता है , उसे संधि कहते हैं।

उदहारण :- हिमालय = हिम + आलय , सत् + आनंद =सदानंद।

संधि के प्रकार (Sandhi Ke Prakar) :

संधि तीन प्रकार की होती हैं :-

  1. स्वर संधि
  2. व्यंजन संधि
  3. विसर्ग संधि

1. स्वर संधि क्या होती है :- जब स्वर के साथ स्वर का मेल होता है तब जो परिवर्तन होता है उसे स्वर संधि कहते हैं। हिंदी में स्वरों की संख्या ग्यारह होती है। बाकी के अक्षर व्यंजन होते हैं। जब दो स्वर मिलते हैं जब उससे जो तीसरा स्वर बनता है उसे स्वर संधि कहते हैं।

उदहारण :- विद्या + आलय = विद्यालय।

स्वर संधि पांच प्रकार की होती हैं :-

(क) दीर्घ संधि

(ख) गुण संधि

(ग) वृद्धि संधि

(घ) यण संधि

(ड)अयादि संधि

(क) दीर्घ संधि का होती है :- जब ( अ , आ ) के साथ ( अ , आ ) हो तो ‘ आ ‘ बनता है , जब ( इ , ई ) के साथ ( इ , ई ) हो तो ‘ ई ‘ बनता है , जब ( उ , ऊ ) के साथ ( उ , ऊ ) हो तो ‘ ऊ ‘ बनता है। अथार्त सूत्र – अक: सवर्ण – दीर्घ: मतलब अक प्रत्याहार के बाद अगर सवर्ण हो तो दो मिलकर दीर्घ बनते हैं। दूसरे शब्दों में हम कहें तो जब दो सुजातीय स्वर आस – पास आते हैं तब जो स्वर बनता है उसे सुजातीय दीर्घ स्वर कहते हैं , इसी को स्वर संधि की दीर्घ संधि कहते हैं। इसे ह्रस्व संधि भी कहते हैं।

उदहारण :- धर्म + अर्थ = धर्मार्थ

  • पुस्तक + आलय = पुस्तकालय
  • विद्या + अर्थी = विद्यार्थी

2. गुण संधि क्या होती है :-जब ( अ , आ ) के साथ ( इ , ई ) हो तो ‘ ए ‘ बनता है , जब ( अ , आ )के साथ ( उ , ऊ ) हो तो ‘ ओ ‘बनता है , जब ( अ , आ ) के साथ ( ऋ ) हो तो ‘ अर ‘ बनता है। उसे गुण संधि कहते हैं।

उदहारण :-

  • नर + इंद्र + नरेंद्र
  • सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र

3. वृद्धि संधि क्या होती है :- जब ( अ , आ ) के साथ ( ए , ऐ ) हो तो ‘ ऐ ‘ बनता है और जब ( अ , आ ) के साथ ( ओ , औ )हो तो ‘ औ ‘ बनता है। उसे वृधि संधि कहते हैं।

उदहारण :-

  • मत+एकता = मतैकता
  • एक +एक =एकैक

4. यण संधि क्या होती है :- जब ( इ , ई ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ य ‘ बन जाता है , जब ( उ , ऊ ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ व् ‘ बन जाता है , जब ( ऋ ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ र ‘ बन जाता है। यण संधि के तीन प्रकार के संधि युक्त्त पद होते हैं। (1) य से पूर्व आधा व्यंजन होना चाहिए। (2) व् से पूर्व आधा व्यंजन होना चाहिए। (3) शब्द में त्र होना चाहिए।

यण स्वर संधि में एक शर्त भी दी गयी है कि य और त्र में स्वर होना चाहिए और उसी से बने हुए शुद्ध व् सार्थक स्वर को + के बाद लिखें। उसे यण संधि कहते हैं।

उदहारण :-

  • इति + आदि = इत्यादि
  • परी + आवरण = पर्यावरण

5. अयादि संधि क्या होती है :- जब ( ए , ऐ , ओ , औ ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ ए – अय ‘ में , ‘ ऐ – आय ‘ में , ‘ ओ – अव ‘ में, ‘ औ – आव ‘ ण जाता है। य , व् से पहले व्यंजन पर अ , आ की मात्रा हो तो अयादि संधि हो सकती है लेकिन अगर और कोई विच्छेद न निकलता हो तो + के बाद वाले भाग को वैसा का वैसा लिखना होगा। उसे अयादि संधि कहते हैं।

उदहारण :-

  • ने + अन = नयन
  • नौ + इक = नाविक

2. व्यंजन संधि क्या होती है :- जब व्यंजन को व्यंजन या स्वर के साथ मिलाने से जो परिवर्तन होता है , उसे व्यंजन संधि कहते हैं।

उदहारण :-

  • दिक् + अम्बर = दिगम्बर
  • अभी + सेक = अभिषेक

व्यंजन संधि के 13 नियम होते हैं :-

(1) जब किसी वर्ग के पहले वर्ण क्, च्, ट्, त्, प् का मिलन किसी वर्ग के तीसरे या चौथे वर्ण से या य्, र्, ल्, व्, ह से या किसी स्वर से हो जाये तो क् को ग् , च् को ज् , ट् को ड् , त् को द् , और प् को ब् में बदल दिया जाता है अगर स्वर मिलता है तो जो स्वर की मात्रा होगी वो हलन्त वर्ण में लग जाएगी लेकिन अगर व्यंजन का मिलन होता है तो वे हलन्त ही रहेंगे।

उदहारण :- क् के ग् में बदलने के उदहारण –

  • दिक् + अम्बर = दिगम्बर
  • दिक् + गज = दिग्गज
  • वाक् +ईश = वागीश

च् के ज् में बदलने के उदहारण :-

  • अच् +अन्त = अजन्त
  • अच् + आदि =अजादी

ट् के ड् में बदलन के उदहारण :-

  • षट् + आनन = षडानन
  • षट् + यन्त्र = षड्यन्त्र

त् के द् में बदलने के उदहारण :-

  • तत् + उपरान्त = तदुपरान्त
  • सदाशय = सत् + आशय

प् के ब् में बदलने के उदहारण :-

  • अप् + द = अब्द
  • अब्ज = अप् + ज

(2) यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) का मिलन न या म वर्ण ( ङ,ञ ज, ण, न, म) के साथ हो तो क् को ङ्, च् को ज्, ट् को ण्, त् को न्, तथा प् को म् में बदल दिया जाता है।

उदहारण :- क् के ङ् में बदलने के उदहारण :-

  • वाक् + मय = वाङ्मय
  • दिङ्मण्डल = दिक् + मण्डल
  • प्राङ्मुख = प्राक् + मुख

ट् के ण् में बदलने के उदहारण :-

  • षट् + मास = षण्मास
  • षट् + मूर्ति = षण्मूर्ति
  • षण्मुख = षट् + मुख

त् के न् में बदलने के उदहारण :-

  • उत् + नति = उन्नति
  • जगत् + नाथ = जगन्नाथ
  • उत् + मूलन = उन्मूलन

प् के म् में बदलने के उदहारण :-

  • अप् + मय = अम्मय

(3) जब त् का मिलन ग, घ, द, ध, ब, भ, य, र, व से या किसी स्वर से हो तो द् बन जाता है। म के साथ क से म तक के किसी भी वर्ण के मिलन पर ‘ म ‘ की जगह पर मिलन वाले वर्ण का अंतिम नासिक वर्ण बन जायेगा।

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उदहारण :- म् + क ख ग घ ङ के उदहारण :-

  • सम् + कल्प = संकल्प/सटड्ढन्ल्प
  • सम् + ख्या = संख्या
  • सम् + गम = संगम
  • शंकर = शम् + कर

म् + च, छ, ज, झ, ञ के उदहारण :-

  • सम् + चय = संचय
  • किम् + चित् = किंचित
  • सम् + जीवन = संजीवन

म् + ट, ठ, ड, ढ, ण के उदहारण :-

  • दम् + ड = दण्ड/दंड
  • खम् + ड = खण्ड/खंड

म् + त, थ, द, ध, न के उदहारण :-

  • सम् + तोष = सन्तोष/संतोष
  • किम् + नर = किन्नर
  • सम् + देह = सन्देह

म् + प, फ, ब, भ, म के उदहारण :-

  • सम् + पूर्ण = सम्पूर्ण/संपूर्ण
  • सम् + भव = सम्भव/संभव

त् + ग , घ , ध , द , ब , भ ,य , र , व् के उदहारण :-

  • सत् + भावना = सद्भावना
  • जगत् + ईश =जगदीश

(4) त् से परे च् या छ् होने पर च, ज् या झ् होने पर ज्, ट् या ठ् होने पर ट्, ड् या ढ् होने पर ड् और ल होने पर ल् बन जाता है। म् के साथ य, र, ल, व, श, ष, स, ह में से किसी भी वर्ण का मिलन होने पर ‘म्’ की जगह पर अनुस्वार ही लगता है।

उदहारण :- म + य , र , ल , व् , श , ष , स , ह के उदहारण :-

  • सम् + रचना = संरचना
  • सम् + लग्न = संलग्न

त् + च , ज , झ , ट , ड , ल के उदहारण :-

  • उत् + चारण = उच्चारण
  • सत् + जन = सज्जन

(5)जब त् का मिलन अगर श् से हो तो त् को च् और श् को छ् में बदल दिया जाता है। जब त् या द् के साथ च या छ का मिलन होता है तो त् या द् की जगह पर च् बन जाता है।

उदहारण :-

  • उत् + चारण = उच्चारण
  • शरत् + चन्द्र = शरच्चन्द्र

त् + श् के उदहारण :-

  • उत् + श्वास = उच्छ्वास
  • उत् + शिष्ट = उच्छिष्ट
  • सत् + शास्त्र = सच्छास्त्र

(6) जब त् का मिलन ह् से हो तो त् को द् और ह् को ध् में बदल दिया जाता है। त् या द् के साथ ज या झ का मिलन होता है तब त् या द् की जगह पर ज् बन जाता है।

उदहारण :-

  • सत् + जन = सज्जन
  • जगत् + जीवन = जगज्जीवन
  • वृहत् + झंकार = वृहज्झंकार

त् + ह के उदहारण :-

  • उत् + हार = उद्धार
  • उत् + हरण = उद्धरण
  • तत् + हित = तद्धित

(7) स्वर के बाद अगर छ् वर्ण आ जाए तो छ् से पहले च् वर्ण बढ़ा दिया जाता है। त् या द् के साथ ट या ठ का मिलन होने पर त् या द् की जगह पर ट् बन जाता है। जब त् या द् के साथ ‘ड’ या ढ की मिलन होने पर त् या द् की जगह पर‘ड्’बन जाता है।

उदहारण :-

  • तत् + टीका = तट्टीका
  • वृहत् + टीका = वृहट्टीका
  • भवत् + डमरू = भवड्डमरू

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, + छ के उदहारण :-

  • स्व + छंद = स्वच्छंद
  • आ + छादन =आच्छादन
  • संधि + छेद = संधिच्छेद
  • अनु + छेद =अनुच्छेद

(8) अगर म् के बाद क् से लेकर म् तक कोई व्यंजन हो तो म् अनुस्वार में बदल जाता है। त् या द् के साथ जब ल का मिलन होता है तब त् या द् की जगह पर ‘ल्’ बन जाता है।

उदहारण :-

  • उत् + लास = उल्लास
  • तत् + लीन = तल्लीन
  • विद्युत् + लेखा = विद्युल्लेखा

म् + च् , क, त, ब , प के उदहारण :-

  • किम् + चित = किंचित
  • किम् + कर = किंकर
  • सम् +कल्प = संकल्प
  • सम् + चय = संचयम
  • सम +तोष = संतोष
  • सम् + बंध = संबंध
  • सम् + पूर्ण = संपूर्ण

(9) म् के बाद म का द्वित्व हो जाता है। त् या द् के साथ ‘ह’ के मिलन पर त् या द् की जगह पर द् तथा ह की जगह पर ध बन जाता है।

उदहारण :-

  • उत् + हार = उद्धार/उद्धार
  • उत् + हृत = उद्धृत/उद्धृत
  • पद् + हति = पद्धति

म् + म के उदहारण :-

  • सम् + मति = सम्मति
  • सम् + मान = सम्मान

(10) म् के बाद य्, र्, ल्, व्, श्, ष्, स्, ह् में से कोई व्यंजन आने पर म् का अनुस्वार हो जाता है।‘त् या द्’ के साथ ‘श’ के मिलन पर त् या द् की जगह पर ‘च्’ तथा ‘श’ की जगह पर ‘छ’ बन जाता है।

उदहारण :-

  • उत् + श्वास = उच्छ्वास
  • उत् + शृंखल = उच्छृंखल

म् + य, र, व्,श, ल, स, के उदहारण :-

  • सम् + योग = संयोग
  • सम् + रक्षण = संरक्षण

(11) ऋ, र्, ष् से परे न् का ण् हो जाता है। परन्तु चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग, श और स का व्यवधान हो जाने पर न् का ण् नहीं होता। किसी भी स्वर के साथ ‘छ’ के मिलन पर स्वर तथा ‘छ’ के बीच ‘च्’ आ जाता है।

उदहारण :-

  • आ + छादन = आच्छादन
  • अनु + छेद = अनुच्छेद

र् + न, म के उदहारण :-

  • परि + नाम = परिणाम
  • प्र + मान = प्रमाण

(12) स् से पहले अ, आ से भिन्न कोई स्वर आ जाए तो स् को ष बना दिया जाता है।

उदहारण :-

  • वि + सम = विषम
  • अभि + सिक्त = अभिषिक्त

भ् + स् के उदहारण :-

  • अभि + सेक = अभिषेक
  • नि + सिद्ध = निषिद्ध

(13)यदि किसी शब्द में कही भी ऋ, र या ष हो एवं उसके साथ मिलने वाले शब्द में कहीं भी ‘न’ हो तथा उन दोनों के बीच कोई भी स्वर,क, ख ग, घ, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व में से कोई भी वर्ण हो तो सन्धि होने पर ‘न’ के स्थान पर ‘ण’ हो जाता है। जब द् के साथ क, ख, त, थ, प, फ, श, ष, स, ह का मिलन होता है तब द की जगह पर त् बन जाता है।

उदहारण :-

  • राम + अयन = रामायण
  • परि + नाम = परिणाम

विसर्ग संधि क्या होती है :-

विसर्ग के बाद जब स्वर या व्यंजन आ जाये तब जो परिवर्तन होता है उसे विसर्ग संधि कहते हैं।

उदहारण :-

  • मन: + अनुकूल = मनोनुकूल
  • नि:+अक्षर = निरक्षर

विसर्ग संधि के 10 नियम होते हैं :-

(1) विसर्ग के साथ च या छ के मिलन से विसर्ग के जगह पर ‘श्’बन जाता है। विसर्ग के पहले अगर ‘अ’और बाद में भी ‘अ’ अथवा वर्गों के तीसरे, चौथे , पाँचवें वर्ण, अथवा य, र, ल, व हो तो विसर्ग का ओ हो जाता है।

उदहारण :-

मनः + अनुकूल = मनोनुकूल ; अधः + गति = अधोगति ; मनः + बल = मनोबल

  • निः + चय = निश्चय
  • दुः + चरित्र = दुश्चरित्र

विच्छेद

  • तपश्चर्या = तपः + चर्या
  • अन्तश्चेतना = अन्तः + चेतना

(2) विसर्ग से पहले अ, आ को छोड़कर कोई स्वर हो और बाद में कोई स्वर हो, वर्ग के तीसरे, चौथे, पाँचवें वर्ण अथवा य्, र, ल, व, ह में से कोई हो तो विसर्ग का र या र् हो जाता ह। विसर्ग के साथ ‘श’ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर भी ‘श्’ बन जाता है।

  • दुः + शासन = दुश्शासन
  • यशः + शरीर = यशश्शरीर
  • निः + शुल्क = निश्शुल्क

विच्छेद

  • निश्श्वास = निः + श्वास
  • चतुश्श्लोकी = चतुः + श्लोकी

(3) विसर्ग से पहले कोई स्वर हो और बाद में च, छ या श हो तो विसर्ग का श हो जाता है। विसर्ग के साथ ट, ठ या ष के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘ष्’ बन जाता है।

  • धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
  • चतुः + टीका = चतुष्टीका

(4)विसर्ग के बाद यदि त या स हो तो विसर्ग स् बन जाता है। यदि विसर्ग के पहले वाले वर्ण में अ या आ के अतिरिक्त अन्य कोई स्वर हो तथा विसर्ग के साथ मिलने वाले शब्द का प्रथम वर्ण क, ख, प, फ में से कोई भी हो तो विसर्ग के स्थान पर ‘ष्’ बन जायेगा।

  • निः + कलंक = निष्कलंक
  • दुः + कर = दुष्कर
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विच्छेद

  • निष्काम = निः + काम
  • निष्प्रयोजन = निः + प्रयोजन

(5) विसर्ग से पहले इ, उ और बाद में क, ख, ट, ठ, प, फ में से कोई वर्ण हो तो विसर्ग का ष हो जाता है। यदि विसर्ग के पहले वाले वर्ण में अ या आ का स्वर हो तथा विसर्ग के बाद क, ख, प, फ हो तो सन्धि होने पर विसर्ग भी ज्यों का त्यों बना रहेगा।

  • अधः + पतन = अध: पतन
  • प्रातः + काल = प्रात: काल

विच्छेद

  • रज: कण = रज: + कण
  • तप: पूत = तप: + पूत

अपवाद

  • भा: + कर = भास्कर
  • नम: + कार = नमस्कार

(6) विसर्ग से पहले अ, आ हो और बाद में कोई भिन्न स्वर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है। विसर्ग के साथ त या थ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘स्’ बन जायेगा।

  • अन्त: + तल = अन्तस्तल

विच्छेद

  • निस्तेज = निः + तेज
  • नमस्ते = नम: + ते

(7) विसर्ग के बाद क, ख अथवा प, फ होने पर विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता। विसर्ग के साथ ‘स’ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘स्’ बन जाता है।

  • नि: + सन्देह = निस्सन्देह
  • दु: + साहस = दुस्साहस

विच्छेद

  • निस्संतान = नि: + संतान
  • अंतः + करण = अंतःकरण

(8) यदि विसर्ग के पहले वाले वर्ण में ‘इ’ व ‘उ’ का स्वर हो तथा विसर्ग के बाद ‘र’ हो तो सन्धि होने पर विसर्ग का तो लोप हो जायेगा साथ ही ‘इ’ व ‘उ’ की मात्रा ‘ई’ व ‘ऊ’ की हो जायेगी।

  • नि: + रस = नीरस
  • नि: + रव = नीरव
  • नि: + रोग = नीरोग
  • दु: + राज = दूराज

विच्छेद

  • नीरज = नि: + रज
  • नीरन्द्र = नि: + रन्द्र

(9) विसर्ग के पहले वाले वर्ण में ‘अ’ का स्वर हो तथा विसर्ग के साथ अ के अतिरिक्त अन्य किसी स्वर के मेल पर विसर्ग का लोप हो जायेगा तथा अन्य कोई परिवर्तन नहीं होगा।

  • अत: + एव = अतएव
  • मन: + उच्छेद = मनउच्छेद
  • पय: + आदि = पयआदि
  • तत: + एव = ततएव

(10) विसर्ग के पहले वाले वर्ण में ‘अ’ का स्वर हो तथा विसर्ग के साथ अ, ग, घ, ड॰, ´, झ, ज, ड, ढ़, ण, द, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व, ह में से किसी भी वर्ण के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘ओ’ बन जायेगा।

  • मन: + अभिलाषा = मनोभिलाषा
  • सर: + ज = सरोज

विच्छेद

  • मनोनुकूल = मन: + अनुकूल
  • मनोहर = मन: + हर

अपवाद

  • पुन: + अवलोकन = पुनरवलोकन
  • पुन: + ईक्षण = पुनरीक्षण
Book Name हिंदी व्याकरण
Quality Excellent
Format PDF
Size 7 MB
Author Harish Academy
Pages 47 Page
Language Hindi हिन्दी

Hindi Grammar Questions Answer

Q1. निम्नलिखित में से कौन सा शब्द विशेषण नहीं है

क. परिचय
ख. स्वस्थ
ग. शिक्षाप्रद
घ. संपन्न

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा शब्द विशेषण है

क. पुरुष
ख. परिष्कार
ग. तालव्य
घ. कुटुम्ब

Q3. निम्नलिखित में कौन सा विकल्प भविष्य काल का द्योतक हैं

क. गीता खाना पका रही है
ख. सोहन पढाई कर रहा है
ग. मुझे दिल्ली जाना है
घ. उसने मुझे पुस्तक दी थी

Q4.रिक्त स्थानों की पूर्ति दिये गये विकल्पों से उचित सर्वनाम /विशेषण चुनकर करें अभी सरोवर में — जल है

क. थोड़ा
ख. छोटा
ग. मोटा
घ. घना

Q5. रिक्त स्थानों की पूर्ति दिये गये विकल्पों से उचित सर्वनाम /विशेषण चुनकर करें —– लडका बहुत चालाक है

क. वह
ख. उस
ग. आप
घ. वे

Q6. इनमें से कौनसा शब्द पत्थर का पर्यायवाची नहीं है?

A. ग्राव
B. पाषाण
C. अश्म
D. चक्षु

Q7. दिए गए शब्दों में कौनसा शब्द नदी का पर्यायवाची नहीं है?

A. निर्झरिणी
B. तरणी
C. तंरगिणी
D. सरिता

Q8. पुत्री का सही पर्यायवाची शब्द क्या है?

A. आत्मजा
B. पौत्रौ
C. गौरी
D. वत्सला

Q9. ‘ क्षीर ‘ का सही पर्यायवाची शब्द क्या है?

A. जल
B. खीर
C. अमृत
D. नीर

(1) भाषा के लिखित रूप में बात बताते हैं।

(A) बोलकर
(B) लिखकर
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
Answer-(B)

(2) भारत की राष्ट्रभाषा है।

(A)उर्दू
(B) हिंदी
(C) अँग्रेजी
(D) इनमें से कोई नहीं
Answer-(B)

(3) व्याकरण भाषा के बताता है।

(A) नियम
(B) काम
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
Answer-(A)

(4) पुष्प कौन-सा शब्द है ?

(A) तत्सम
(B) तद्भव
(C) देशज
(D) विदेशज
Answer-(A)

(5) उ, ऊ के उच्चारण स्थान है ?

(A) दन्त
(B) कण्ठ
(C) ओष्ठ
(D) होठों
Answer-(D)

(6) ए, ऐ, ओ, औ कौन सा स्वर है ?

(A) हस्व स्वर
(B) दीर्घ स्वर
(C) संयुक्त स्वर
(D) इनमें से कोई नहीं
Answer-(C)

(7) मात्राएँ कितने प्रकार के होते है ?

(A) दो
(B) तीन
(C) पाँच
(D)सात
Answer-(B)

(8) हिन्दी में व्यंजनवर्णो की संख्या कितनी है ?

(A) 22
(B) 10
(C) 33
(D)30
Answer- (C)

(9) कवर्ग का उच्चारण-स्थान है ?

(A) मूर्धा
(B) दन्त
(C) ओष्ठ
(D) कण्ठ
Answer-(D)

(10) पवर्ग का उच्चारण स्थान है ?

(A) दन्त
(B) कण्ठ
(C) ओष्ठ
(D) मूर्धा
Answer-(C)

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Note – यह अंग्रेजी बोलने वाले देश में बढ़ रहे बच्चे के लिए हिंदी मजेदार सीखता है। इस पुस्तक का ध्यान पहेलियों, गतिविधियों और खेलों की एक श्रृंखला के माध्यम से हिंदी व्याकरण की मूल बातें पढ़ाने पर है। लक्ष्य, श्रृंखला की अन्य दो गतिविधि पुस्तकों में, दिलचस्प गतिविधियों के माध्यम से बुनियादी अवधारणाओं को सीखना है। इस पुस्तक में अभ्यास का उपयोग करके खुद को हिंदी व्याकरण सिखाएं। व्याकरण वास्तव में एक दिलचस्प विषय हो सकता है। Notes को Download करने के लिए नीचे दिए गए Download Button को दबाये.

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